Thursday, 26 April 2012

सूचना अधिकार अधिनियम का सच
उत्तर प्रदेश में  सूचनाधिकार अधिनियम सफ़ेद हाथी साबित हो रहा है  / उक्त अधिनियम के तहत आवेदक द्वारा आवेदन करने पर या तो  कोइ जवाब नहीं दिया जाता है  या गलत सूचना दे दी जाती है  / पुनः आवेदक द्वारा प्रथम अपील करने पर अपीलीय अधिकारी द्वारा अपील पर कोई सुनवाई नहीं की जाती है जबकि अधिनियम के साथ साथ  मुख्या सचिव का स्पस्ट आदेश विद्यमान है की अपीलीय अधिकारी अपील पर सुनवाई करते हुए सूचना दिलाने के साथ साथ अपील पर निर्णय  स्पीकिंग आर्डर के रूप में करें  किन्तु मुख्या सचिव के आदेश का पालन  अन्य विभागों में तो दूर  स्वयं मुख्यसचिव सचिवालय  के अपीलीय अधिकारी द्वारा नहीं किया जाता है / अन्ततोगत्वा आवेदक अंतिम आस के साथ अंतिम अपील आयोग में करता है आयोग में  अपील पर सुनवाई सुरु होने की कोई सूचना आवेदक को नही दी जाती  यदि आवेदक किसीतरह से पतालागाकर आयोग में सुनवाई के समय उपस्थित होता  है तो वहां सूचना की जगह तारिख मिलती है  तथा माननीय आयुक्त महोदय निस्पछ आयुक्त के स्थान पर ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे वो सुछानाधिकारी के वकील हों  बिना सूचनाधिकारी द्वारा दीगयी   सूचना की जाँच  किये  बिना स्पीकिंग आर्डर के वाद का निस्तारण  कर दिया जाता है / इस  पूरी प्रक्रिया  में लगभग दो साल  का समय और धन खर्च  होने के बाद सूचना  तो नहीं  मिलती  मिलता है तो  सम्बंधित  अधिकारी द्वारा  अंत हीन उतपीरन  / पिछली दो सरकारों  के कार्य काल  में  किसी भी सर्कार ने सूचनाधिकार के लिए संवेदनशीलता  नहीं दिखाई  दिखी तो केवल अपनों को  बिना योग्यता का विचार किये  आयुक्त बनाने का सफल प्रयास 
 उठो संगठित  हो और अपने अधिकारों के लिए  संघर्स  करो / संघर्स सफलता की कुंजी है

No comments:

Post a Comment