Saturday, 28 March 2015

गुड़वत्तापूर्ण शिक्षा का अचूक उपाय यदि सरकार ईमानदारी से सिक्षा सुधारना चाहती है तो लागू करे

शिक्षा सुधारने का अचूक फार्मूला

अगर शिक्षा का स्तर सुधारनाहै तो केवल एक आदेश की जरूरत है ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर लोकसभा सदस्य के बच्चे संबन्धित क्षेत्र के  सरकारी स्कूल मे अध्यन करेंगे जिनके बच्चे  प्राइवेट स्कूल मे पढेंगे वे चुनाव नहीं लड़ सकते तथा गाँव के पंचायत सचिव से लेकर प्रदेश तथा देश के मुख्य सचिव के बच्चे कार्य क्षेत्र मे नजदीक के  सरकारी स्कूल मे पढ़ेंगे जिनके बच्चे सरकारी स्कूल मे नहीं पढ़ेंगे वे सरकारी नौकरी मे न तो लिए जाएंगे और जो हैं उनकी सेवाएँ समाप्त कर दी जाएंगी
किन्तु हमे आशा ही नहीं पूर्ण विस्वास है की यह व्यवस्था लागू नहीं होगी क्यूँ की यहाँ के नेता और उनके कमाऊ पूत नहीं चाहते की देश की जनता पढे ये तो बस सिक्षा के नाम पर दिखावा कर रहें है
श्लोक शुक्ल
9839398880

Monday, 22 July 2013



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Friday, 18 May 2012

बेरोजगारीभत्ते का सच 

असली फायदा किसको बेरोजगार या राजस्व विभाग के भ्रस्तअधिकारीयों

अधिकारीयों ने बेरोजगारी भत्ता योजना नियमावली  बनाने में  बेरोजगारों  के बजाय  तहसील के घूस खोर लेखापाल तथा बेईमान बाबुओं का हित देखा जब भत्ता पाने केलिए किसी प्रकार की जाती आधारित व्यवस्था नहीं है तो फिर जाती प्रमाणपत्र की मांग क्यों  जबावेदक को बैंक से खाते का प्रमाण पत्र लेना है ओर  बैंक में  खता बिना निवास के नहीं खुलता है  तो फिर अलग से निवास प्रमाणपत्र की मांग क्यों आय प्रमाण  तो उनही लोगो का बनता है जो लेखपाल को उसकी मांग के अनु रूप सुविधा शुल्क  देने में समर्थ होते हैं जो वास्तव में गरीब होते हैं  उनके लिए आय प्रमाणपत्र बनवापना संभव नहीं होता   ऐसे  में  बेरोजगार के लिए आय जाती निवास  प्रमाणपत्र बनवाने केलिए  कमसे कम रूपया 1000 एक हजार किअवास्यकता होगी तथा सपथ पत्र का रूपया 100 फार्म जमा करने का सुविधा शुल्क रूपया 100 टिकट लिफाफा आदि का 100  किरयाभारा आदि जोरकर  लगाभः एक आदमी पर कमसे कम रूपया 2000 लगेगा सवाल ये बनता है की जो वास्तव में बेरोजगार है वो इतना पैसा लाये कहाँ से  जिसकी व्यवस्था बेरोजगार के लिए मुस्किल होगी  ऐसे में जहाँ बेरोजगार आवश्यक पेपर बनवाने में तह्सील में एक मेज  दूसरी मेज पर चक्कर लगाना परेगा वही दू सरी ओ र  तहसील के कर्मचारी मालामाल होंगे  वर्त्तमान में  बेरोजगारों के हित के लिए बनायीं जाने  योजना में आय जाती निवा स   यह सोचे बिना की इसकी उपयोगिता क्या है लागू  करना यह दर्शाता है की  सारी  योजनायें गरीबों को लू टने के लिए बनी हैं  सर्कार के लिए उचित होगा की  वोह कोई नयी यो जना भले न बनांये  पर  जनता को लू टने वाले  तहसील  ब्लाक  तथा  थाना को भ्रस्ता चार मुक्त करदे  जिसके लिए आवश्यक है की जवाब देहि सुनिश्चित की जा सके आवश्यकता नए कानून बनाने की नहीं है आवश्यकता है  बनेहुए कानून पर अमल करने की   मे  यह बात सप्रमर कह सकता हूँ की  सरकारी नियमो  का पालन  लेखापाल से लेकर मुख्य  सचिव कार्यालय  तक में नहीं होता है     

यदि सरकार वास्तव में बेरोजगारों के लिए कुछ  करना चाहती है  उसे ततकाल  भत्ता पाने केलिए बनाई गयी नियम वाली में संसोधन करके  तहसील से आय जाती निवास समाप्त करके केवल बेरोजगार से सपथ पत्र इस बात का ले की वह बेरोजगार है  तथा उसका निवास जातीजो फार्म में अंकित है सही यदि ये गलत पाया जाता है तो आवेदक भत्ता वापस  करने को बाध्य होगा 

Thursday, 26 April 2012

सूचना अधिकार अधिनियम का सच
उत्तर प्रदेश में  सूचनाधिकार अधिनियम सफ़ेद हाथी साबित हो रहा है  / उक्त अधिनियम के तहत आवेदक द्वारा आवेदन करने पर या तो  कोइ जवाब नहीं दिया जाता है  या गलत सूचना दे दी जाती है  / पुनः आवेदक द्वारा प्रथम अपील करने पर अपीलीय अधिकारी द्वारा अपील पर कोई सुनवाई नहीं की जाती है जबकि अधिनियम के साथ साथ  मुख्या सचिव का स्पस्ट आदेश विद्यमान है की अपीलीय अधिकारी अपील पर सुनवाई करते हुए सूचना दिलाने के साथ साथ अपील पर निर्णय  स्पीकिंग आर्डर के रूप में करें  किन्तु मुख्या सचिव के आदेश का पालन  अन्य विभागों में तो दूर  स्वयं मुख्यसचिव सचिवालय  के अपीलीय अधिकारी द्वारा नहीं किया जाता है / अन्ततोगत्वा आवेदक अंतिम आस के साथ अंतिम अपील आयोग में करता है आयोग में  अपील पर सुनवाई सुरु होने की कोई सूचना आवेदक को नही दी जाती  यदि आवेदक किसीतरह से पतालागाकर आयोग में सुनवाई के समय उपस्थित होता  है तो वहां सूचना की जगह तारिख मिलती है  तथा माननीय आयुक्त महोदय निस्पछ आयुक्त के स्थान पर ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे वो सुछानाधिकारी के वकील हों  बिना सूचनाधिकारी द्वारा दीगयी   सूचना की जाँच  किये  बिना स्पीकिंग आर्डर के वाद का निस्तारण  कर दिया जाता है / इस  पूरी प्रक्रिया  में लगभग दो साल  का समय और धन खर्च  होने के बाद सूचना  तो नहीं  मिलती  मिलता है तो  सम्बंधित  अधिकारी द्वारा  अंत हीन उतपीरन  / पिछली दो सरकारों  के कार्य काल  में  किसी भी सर्कार ने सूचनाधिकार के लिए संवेदनशीलता  नहीं दिखाई  दिखी तो केवल अपनों को  बिना योग्यता का विचार किये  आयुक्त बनाने का सफल प्रयास 
 उठो संगठित  हो और अपने अधिकारों के लिए  संघर्स  करो / संघर्स सफलता की कुंजी है

Wednesday, 23 November 2011

know your self then cheng in your life

एक किसान था  वह प्रतिदिन अपनी भेंड चराने जंगल जाता था एक दिन उसे एक सेर का बच्चा मिला किसान उसे अपनी भेन्डों के साथ रखता धीरे धीरे सेर का बच्चा बड़ा हो कर सेर बन गया वहा भेंडो के साथ भेंडो की तरह रहता था एक दिन एक सेर ने भेंडो पर हमला कर दिया सेर को देख कर भेंडो के साथ सेर भी दर कर भगा  सेर ने दोरकार सेर को पकर कर कहा तू क्यों भाग रहा है  सेर दर गया कहा मुझे मत मारो सेर ने कहा तू सेर का बच्चा हो कर डरता है तथा उसे पकर कर कुआं के पास लेजाकर कुँए में अपना तथा उसका प्रतिबिम्ब दिखाकर बोला देख जो मैं हूँ वही तुम हो यह कह कर उसने एक दहार लगी और उसे भी वैसी आवाज लगाने को कहा उसने कोसिस की दो तीन कोसिसों के बाद उसकी भी दहार वैसी हुई  अब वह अपने को पहचान गया अपनी पहचान होते ही भेड़ों के साथ में में करनेवाला जंगल का राजा बन गया इसी तरह हम भी अपने को भूल कर इधर उधर में में करते है जिस दिन हमने अपने को जान लिया की मै उस सर्व सक्तिमान का श्रेष्ठ  पुत्र हूँ  उस दिन की बाद हमारी दहार के आगे कोइ नहीं ठहर सकता मैं संसार के राजा के पुत्र की तरह निडर  हो जाऊंगा इस लिए उठो जागो अपने को पहचानो तथा भय मुक्त हो कर जियो